महबूब की रुखसती ।

उनकी एक ख़ुदा हाफ़िज़ ! ने ,
ख़ुदा को हमारा निगहबान बना दिया ।
हम तो ग़फ़लत की नींद में सो रहे थे ,
उन्होंने ही आके हमें जगा दिया ।

               - शाहीर रफ़ी 

कभी - कभी कुछ ऐसा वाक़या हो जाता है ,दौर-ए-हयात में की उन्हें भूल पाना आसान नहीं होता । कुछ वाक़यात अच्छे होतें हैं और कुछ बुरे ,और कुछ ऐसे भी जिनको आम लफ़्ज़ों में बयां नहीं किया जा सकता । मसलन किसी ख़्वाब का अगर तज़किरा करने को कहा जाए ,या किसी के ग़ैब की ख़बर रखना ,काफ़ी मुश्किल काम है । मुहब्बत भरी निगाह भी ऐसी ही एक मलकुति चीज़ होती है । किसी - किसी इंसान की नज़र में इतनी राहत होती है ,के एक बार नज़र होजाए ,तो बार - बार ,नज़र लगने की लत लग जाती है । और किसी - किसी इंसान की ज़ुबाँ इतनी शीरीं होती है ,के मुसलसल उन्हें सुनने को जी चाहता है। ऐसी ही एक ख़वातीन से कभी मुलाकात हुई और उनके सलाम में वह तासीर थी के दिल के रेशे - रेशे में असर कर गई । इसी वाक़यात पर यह 4 पंक्तियाँ
पेश-ए-ख़िदमत करना चाहता हूँ ।मुलायज़ा फरमाएं :heart::heart::heart:

Word meanings :

वाक़या(s)/वाक़यात§ - घटना/incident
दौर-ए-हयात - जीवन काल के अंदर /within the life span .
मसलन - for example .
तज़किरा - describe .
ग़ैब - the things going inside the mind of a person .
मलकुति - superficial
शीरीं - मधुर / sweet/soothing
मुसलसल - constantly
ख़वातीन - a lady ,
तासीर - प्रभाव, असर/ effect
पेश-ए-ख़िदमत - presenting before you
ग़फ़लत - ignorance

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Likhte likhte tum or padhte padhte hum
Bhool jaate hai
Kab time guzar gya
Kaha hum hai
Bas maza aata hai

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Once again beautiful

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