शहंशाह-ए-तरन्नुम : स्वर्गवासी मुहम्मद रफ़ी साहब ।

शिक़वा -ए- दिल, तो बस एक ही है शाहीर ,
के दौर -ए- मोहम्मद रफ़ी में तू पैदा न हुआ ।
कितना बदनसीब मौसीक़ार है तू ,
के मौसीक़ी के पयंबर पर तू शैदा न हुआ ।

                - शाहीर रफ़ी
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We all share a conflict of not being able to be born at certain time. Well I agree with you on it

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