ग़ज़ल "करके देखी है"

इबादत करके देखी है हिकारत करके देखी है
सभी से हम ने भी तो हर शिकायत करके देखी है

न पूछो अब हमारा हाल क्यूं अनजान रहते हैं
यहां सब पे भरोसा कर अजीयत करके देखी है

ज़माना हम से जलता है खटकती हूं निगाहों में
कफ़स को तोड़ कर मैंने बगावत करके देखी है

हमें ना उन ने समझा है उन्हें ना हम ने समझाया
समझने और समझाने कि रग़बत करके देखी है।

शबे फुर्कत किसी को भी मिले ना ऐ मिरे मौला
सनम से दूर रहकर भी मुहब्बत करके देखी है

~मनु जैन

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Kya baat! :heart:

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