कल्पना

फलक और चांद का संवाद ढूंढती हूं
मै मलंगी वादियों के सब राज़ सुनती हूं!

हर तारे में नया जहान चुनती हूं,
मै सिरफिरी मेरी चुनर में आसमां बुनती हूं!
-Shubhangi

3 Likes

wah… :clap: bohot khoobsurat… :cherry_blossom:

Wa
@SHUBHANGI_ARYAN
:clap::bouquet: