क्या वो हृदय कभी हृदय हो सकता था?

क्या वो हृदय कभी हृदय हो सकता था?
-अलवीरा हफ़ीज़

वो दिन भी कितना काला होगा,
अनंत अन्धकार चारों दिशाओं में फैला होगा,
जिस दिन किसी की आस्था को मिटाने का संकल्प हुआ होगा,
निर्दोष की हत्या करना और भयभीत करना एक विकल्प हुआ होगा,
क्या वो हृदय कभी हृदय हो सकता था?

जब किसी के आसूँओ और रक्त से, एक भूमि जीती गयी,
जब उस निर्दोष का कटा शव देखकर, उसकी माँ चीखती गयी,
उस सुहागन का सुहाग उजाड़ कर, उसको यमराज से मिला दिया,
उस पिता को बेसहारा छोड़ कर, उसके परिवार का गर्व मिट्टी में मिला दिया,
क्या वो हृदय कभी हृदय हो सकता था?

किसी की श्रद्धा को ठेस पहूंचाकर, तुम सोचते हो वो तुम्हारा साथ दे,
तुम्हारे उस ध्रम और सत्या के ढोंग मे, वो तुम्हारा साथ दे,
क्या वो काला दिन सोचकर तुम्हारे नेत्र नम नही होते,
क्या कोई तुम्हारे परिवार का होता, तब भी गम में नही होते,
क्या वो हृदय कभी हृदय हो सकता था?

अरे! लज्जा आनी चाहिए ऐसी जीत पर,
लज्जा आनी चाहिए ऐसी निर्दयी रीत पर,
किसी के हृदय को कुचल कर, निर्दोशो की निर्मम हत्या कर,
किसी एक समुदाये को बड़ा बताकर, लज्जा है ऐसी कठोरता पर,
क्या वो हृदय भी कभी हृदय हो सकता था?

ऐसा हृदय कभी हृदय नही हो सकता था,
घृणा और आक्रोश से भरा व्यक्ति कभी हृदय से पवित्र नहो हो सकता था,
यदि ऐसे हृदयो का मिलन होगा तो रक्त की नदियाँ बहेन्गी,
हर व्यक्ति ऐसे हृदय से अन्याय और अत्यचार ही सहेगा,
प्रेम केवल प्रेम ही ऐसे हृदय को हृदय बना सकता है!
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हिन्दी
बहुत खूब
अच्छा लगा, तुम्हारा यह लेख पढ़ कर
बहुत इत्मीनान से लिखा और संजोया गया है
:ok_hand::ok_hand::ok_hand:

वैसे ये है किस विषय पर???

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धन्यवाद आपका!

बस कुछ शब्द जो दीमाग मे निरंतर आ रहे थे, अब कलम से अपने आप को व्यक्त करनी की ज़िद पकड़ बैठे। जो कुछ चल रहा था मन में एक उलझन काफी समय से, वो सब बिखेर दी मैने अपने इस कार्य में। बस अत्याचार और अन्याय देख कर मन व्याकुल होने लगता है।

:heart::heart::heart:

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kya baat hai…

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Very well written :two_hearts::two_hearts::ok_hand:

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Thank u​:heart::heart::heart:

Thank you so much!!:heart::heart:

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