टूटी पायल के घुँघरू

वो टूटी हुई पायल के कुछ घुँघरू मिले चादर बदलते हुए
वो आईना ख़ामोश है जो तारीफें करता था तुझे देख के संवारते हुए।

तेरे बाद कोई सँजो ना सका सब देखते रखे मुझे बिखरते हुए।
मौत भी क़रीब से गुज़र गई मेरी तलब से डरते हुए।

उम्र गुज़र रही है तुझे याद करते हुए।
बच जाता हू रोज़ ना जाने कैसे कैसे मरते हुए!

Shah Talib Ahmed

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@TALIB_ahmed
:sweat_smile::bouquet::clap:

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Thanks a ton bro

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