तुम मुझे यु याद न आती तो अच्छा था"

सावन में सुमन की यु ठंडी बयार न होती,
चाँदनी की गोद में प्रकृति श्रंगारित न होती।
इन प्यासे नयनों में तुम्हारी तस्वीर न आती,
तुम्हारा मिलन मुझसे न होता तो अच्छा था,
तुम मुझे यु याद न आती तो अच्छा था।।

झिलमिल तारे टूट रहे है ये मन की पीड़ा से।
सूख रहा है कन्ठ हमारा तुम्हारे रूठने से,
समुद्र का प्रेम लहरो से होते हुए हमने भी देखा,
आकाश से जुड़कर फिर अलग होते हुए हमने देखा,
तुम मुझसे प्रेम न करती तो अच्छा था,
तुम मुझे यु याद न आती तो अच्छा था।।

बोलो अर्ध चाँद में पूर्ण प्रकाश कब आया?
क्या तुम्हारे मनको मेरा मन नही भाया?
तुम्हारे ओठो की मुस्कान को हम प्यार समझ बैठे
तुम्हारी उस खामोशी को हम इजहार समझ बैठे,
तुम मुझसे मुँह मोड़कर न जाती तो अच्छा था,
तुम मुझे यु याद न आती तो अच्छा था।।

:bouquet:"शिवेंद्र मिश्रा’"आकाश’:bouquet:

5 Likes

bahut hi khubsurat @Shivendra_Mishra

2 Likes

Ji dhanyawad :pray:

1 Like