सारे अरमान मेरे;

तू जो हुआ दूर मुझसे
टूटे सरे अरमान मेरे,
में तो तनहा थी तभी
तेरे आने से पहले,
मिले हम इत्तेफ़ाक़ से
यूँ ना सोचा था मैंने की मर मिटेंगे तुमपर,
तक़दीर बदल दी उसने मेरी
तू आया भी तो बस कुछ पल के लिए,
सारी खुशियां क़ुर्बान कर दी मैंने तुझपर,
खुदगर्ज़ निकला तू भी, मुझको अकेला छोड़कर
समजा दिया की ये मुनासिब नहीं इश्क़ करके दर्द ना मिले तो,
में तो एक मंज़िल लेकर चली,सपनों की उड़ान तूने बरी
ख़्वाबों में सोते ये नींद आज तुझको दफना कर चली,
तूने मेरी ज़िन्दगी बदली मैंने तुझको जीने की उम्मीद दी
सच कहते है लोग की प्यार एक ऐसी बीमारी है जिसकी कोई दवा नहीं होती,
इन् आँखों की नमी दिल को गम दे गयी
इन् सुखें होठों पर नकली सी हसी चा गयी,
कितने प्यार से रह्मा दिखाई थी उसने मुझे
बिछड़कर उसने मेरे इश्क़ को कमज़ोर बता दिया ,
हो फुरक़त का सबब कुछ भी मगर अनजाने में
हुई गलती को कभी माफ़ नहीं कियाजाएगा…
अभ फिर लौट कर मत आना
में तो आइना हु टूटना मेरी फितरत है
इसीलिए पत्थरों से मुझको कोई गिला नहीं.

“तू जो गया मुँह मोड़कर
अरमान मेरे सारे बिखर गए!!”

~kamu pillai

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