पिता एक फरिश्ता

अंबर जितना बोझ रखें है सर पर
फिर भी कहता मुझ पर कोई बोझ नहीं है

बेटी को गोद लेता , सहलता और कहता
बेटी तुझ जैसा मेरी दुनिया में कोई नहीं है

घर में रंगत उससे , घर में बरकत है उससे
पिता परमेश्वर है दूजा और कोई नहीं है

उदास होने पर भी उदासी छुपाता है
पापा तेरे अलावा मेरी मुस्कान और कोई नहीं है

उसकी अंखियां मोती झलकें जाती
तब भी कहता लाडो मुझे दुःख कोई नहीं है

हूं जब तलक पापा मैं तेरी सल्तनत में
मेरे जीवन का हकदार बस तू है और कोई नहीं है

~मनु जैन

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Bhut khoob :sparkles:

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