इस सही गलत की कस्मोकस मै

इस सही गलत की दुनिया में,
तुम सही ठहरे और हम गलत,
तुम अच्छे थे और हम बुरे,
तुम सब कुछ थे और हम कुछ भी नहीं ।
’ फिर भी ’ ये सवाल आता है ,
और ’ फिर भी ’ बस यही याद आता है ।

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