वो इक शख्स ❤

कभी कभी ऐसा होता है ये जिंदगी बहुत धीमी पड़ जाती है
क्या कहना है, क्या छिपाना है, इस बात का इल्म बखूबी होने लगता है।
आपके अंदर सवालों से भरा वो शख्स अचानक खाली हो जाता है, खत्म हो जाती है वो सारी उम्मीदें जिनको सहेज कर रखने में साल लग जाता है।
आप जिंदगी के उस मोड़ पे आ खड़े होते हो, जहां खुद को बहुत हारा हुआ मानते हो।
नाराज़गी, शिकायतें इन सबके कुछ खास मायने रह नहीं जाते हैं।
किसी के होने का एहसास जब मर जाता है, तो उनके जाने पर कोई कमी महसूस नहीं होती। और आप इस पराये शहर मे ऐसे हो जाते हो जैसे किसी किताब को पूरा पढ़कर रद्दी मे बहा दिया हो।
उस वक्त ले देकर रह जाता है, वो एक शख्स जो आपको जिंदगी के असल मायनें बताता है, जो आपको परियों की कहानियों से खींचकर ऐसी दिशा के पास लाकर खड़ा कर देता है जहां से आपको अपनी मंजिल बहुत साफ दिखाई देती है।
आप उससे सीखते हो कि जिंदगी की हर लड़ाई को बिना लड़े भी जीता जा सकता है
जो आपकी कमियों को चार लोगों के सामने बेपर्दा नहीं करता।
जो आपके हर राज़ को ऐसे महफूज़ रखता है, जैसे एक मां नये जन्मे बच्चे को अपनी गोद मे छुपा कर रखती है।
उस शख्स की हथेलियों को देखकर आप अंदाजा लगा लेते हो
कि बचपन मे बाबा आपके चार खिलौनों के लिए क्या क्या करते होगें
उस अंधेरे कमरें मे बैठे चालीस लोगों के बीच उस एक शख्स को आसानी से पहचान लेते हो।
कल किसने देखा है, सफर के अंत तक कौन रह जाएगा कौन छूट जाएगा इस बात को अभी समझ पाना बहुत मुश्किल है
लेकिन कभी अगर चलते चलते उस एक शख्स ने हाथ छुड़ा लिया तो…
इस बात को सोचकर आप अंदर से कांप जाते हो।
ये आपकी जिंदगी का वही शख्स होता है जिसे आप अपने परिवार के बाद दूसरा दर्जा देते हो

3 Likes