वो बचपन ही सुहाना था

छूट गया वो लमहा , जब बचपन सुहाना था !!

कागज की नाव पे हक हमारा था |
किताबो की लिखावट पे ये दिल हमारा था !!
बगीचों के आंगन में खेल हमारा था,
छूट गई वो यादे जब बचपन हमारा था !!

बढ़ता गया , आगे बढ़ता गया , इस भीड़ में कहीं खोता गया |
मंजिलों की तलाश में, यूहीं भटकता रहा |
याद आया फिर वो दिन ही सुहाना था |
छूट गया वो लम्हा , जब बचपन सुहाना था !!

मम्मी की डांट से आशु गिर जाते थे , बाप की फटकार से हम डर जाते थे |
जब भी मैने कोई फ्रमाएइश की , जादु की छड़ी से पूरी हो जाती थी |

बचपन की याद में एक चीज सुहानी थी , कागज के उड़ते जहाजों पर मुस्कान हमारी थी |
लड़ते है जब अपने बहनों से तो मां की डांट हमारी थी !!
बचपन के खेलो में , लुका छिपी हमारी थी !!
तुम्हे याद हो या ना हो , वो बचपन ही सुहाना थी !!

4 Likes