एक आम इंसान

मैं एक आम इंसान हूं , आम जिंदगी जीता हूं ।
छोटी-छोटी बातों पर हंसता हूं और रोता हूं ।
कोई कुछ कहे तो नजर अंदाज करता हूं ।
कोई मुझे सराहे तो उनसे प्यार करता हूं ।
कोई रूठ जाए तो उसे मनाता हूं ।
मैं भी पैदल चार कदम चलता हूं ।
बागों में फूलों में बस यूं ही घुलता मिलता हूं ।
थक जाता हूं तो फिर रुकता हूं ।
फिर कहीं अपनी मंजिल की ओर बढ़ता हू ।
कुछ कहता हूं, कुछ समझता हूं ।
इस दुनिया को मैं इसी तरह जीता हूं ।
मैं एक आम इंसान हूं, आम जिंदगी जीता हूं ।

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