बापू तूं था सबसे अनूठा।

मेरा बापू,
था सबसे अनूठा,
बहुत करता था प्यार,
मुझसे,
कभी नहीं करता इंकार,
चाहे तो जो भी हो बात।
अगर मैं घर से बाहर जाता,
कभी देरी से आता,
उसको जागता पाता।
जब तक घर न पहुंचता,
उसका फोन आता रहता,
बार बार पुछता,
कहां है तूं,
ठीक है तूं,
मैं झुंझलाहट में,
कई बार फोन काट देता,
थोड़ी ही देर में फोन,
फिर से बज उठता,
देखता,
बापू को दुसरी तरफ पाता।
कभी मैं बीमार हो जाता,
तो मुझे सबसे अच्छे डाक्टर के पास ले जाता,
मै बोलता,
बापू बस में चलते,
वो बोलता,
नहीं तूं हैं बीमार,
जाएंगे टैक्सी में इस बार।
जब कभी शहर जाते,
मुझे अच्छे से शोरूम में ले जाता,
और कहता,
अनिल कर लें पसंद,
जो भी चाहिए,
और विल स्वयं भर देता।
मां हो गई थी बीमार,
खाना बनाने पे बात आती,
तो बापू स्वयं खाना बनाता,
और सारे परिवार को खिलाता।
हम तीनों भाईयों के पास,
नहीं थी घड़ी,
बापू एचएमटी के गया शोरूम,
ले आया घड़ीयां तीन,
हम सबने पहनी,
लेकिन अपने लिए,
वहीं टाईटस की घड़ी,
दस साल पुरानी,
धक्के धक्के दे दे के चलानी।
ये तो सब था हमारे साथ,
हमारा बापू,
करता था दुनिया का उपचार,
जब कभी कोई किसी को दिक्कत आई,
और बापू के आगे फरमाइश लगाई,
बापू तुरंत तैयार हो जाता,
और झट से समाधान निकालता।
बापू अपने डिपार्टमेंट में भी था सबसे आगे,
मै बोलता था उसे,
इंस्पैक्टर झींडे,
बापू ने ऐसे ऐसे केस किए हल,
जो नहीं बरसों से किसी ने छुए।
बापू था बहुत ईमानदार,
जब कभी हेराफेरी की बात आती,
बापू की भोंहे चढ़ जाती।
बापू स्वेरे सात बजे आफिस जा बैठता,
रात को दस बजे लौटता,
पुरा मैहकमा परेशान
बापू की बदली का करे इंतजार।
बापू तूं था सचमुच अनुठा,
तेरे जैसा नहीं होगा दूजा,
आज तूझे छोड़े दुनिया,
हो गये तीन साल,
परंतु लगता,
जैसे तूं धड़कता मेरे अंदर हर सांस।

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Nice :heart:

Thanks Lekhanis.

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