वो पहला खत

वो पहला खत याद है मुझे
खॉबो मै बादल और दिल मै उड़ान थी ।

कुछ ऐसा हुआ कि मन मेरा बेचैन हुआ ,
उसकी खत के पन्नों पर मेरा नाम था ।
कुछ प्यार सा समाया था ,
उनकी बातो मै अपनापन स्ताया था ।
वो पहला खत मुझे याद है
खब मै बादल और दिल में उड़ान थी

उसने डाली थी खत मेरे बस्ते मै ,
चॉकलेट भी था वहीं सस्ते मै ।
मैंने देखा तो मंड मंड मुसकाई ,
न जाने ये कोंन सा रांझा ने ये प्रीत लगाई ।
मै पढ़ी , उसके तो कुछ खॉब थे
खाब मै बादल और दिल में उड़ान थी ।

अब बारी मेरी थी , जवाब भी देना मजबुरी थी ।
जिसने दी थी , वो मेरा प्यार था ।
अब मैने भी खत लिखा ,
दिल को मोतियों मै पिरो के ,
उनको खत लिखा ।
"प्यार था मुझे उनसे, मैने उनसे सांझा किया
तेरी मेहबूब बनने आई , मैने तेरा मान किया "

अब जवाब जो दिया मैने ,
दिल मेरा बेचैन था ।
पता था हम दोनों का मेल था ।
मै घबराई थी , वो नज़रे चुराए था |
मै पास गई , उसके होटों पर मुस्कान थी |
पास बुलाकर, कस लिया उसने अपने बाहों में ,
मै खो चुकी थी इस अनजानी राहो मै |
वो पहला खत याद है मुझे,
खाब मै बादल और दिल में उड़ान थी |

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Wow! :heart:
Welcome to YoAlfaaz! :heart:
Keep sharing your thoughts! :hibiscus:

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Thankew :two_hearts:

nice one…
welcome to YoAlfaaz family :blush:

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Thanks you :grin: