पिता की ज़िंदगी

खुद की ज़िन्दगी की क़दर छोड़कर,
हमे हमारी ज़िन्दगी की क़दर करना सिखाया हैं।
ख़ुद सुरज की आग में तप कर ,
हमको सोना बनाया हैं।

ख़ुद हर लम्हा हारकर हमे खुशियों,
के पल दिए हैं
घर जैसा तोहफा जिसने दिया हैं
वही पूरे दिन उस घर से बाहर रेहते हैं

बने तो वो भी मामूली इंसान हैं,
लेकिन हमारे लिए सुपर हीरो हैं,
ज़िद्दी तो वो भी कभी थे, लेकिन पिता
बनकर, अपने बच्चो की ज़िद्द के आगे झुके हैं,

घर की नींव हैं, घर की पहचान हैं,
पिता ना हो, तो कुछ भी नही हैं,
बिना उनके कोई घर घर नही हैं,

जज़्बात छुपा लेते हैं, दर्द छुपा लेते हैं,
हमको पूरा कर खुद टुकड़ो में टूट जाते हैं,
प्यार में त्याग करना क्या होता हैं, ये पिता से सीखे,
अपने परिवार पर ज़िन्दगी कुर्बान करना क्या होता है,
ये कोई पिता से सीखे।

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