कोन है तू

कोन है तू कहा को निकला हैं
दिखता इस भीड़ में काफी तन्हा सा हैं
अरसे से किसी सफर में हैं तू
लगता हैं किसी मंज़िल की तलाश में हैं
ख्वाब तेरे भी हैं आस्मा को छूने वाले,
लगता है किसी बंजर जमी को फाड़के निकला है
ज़िंदगी में है मशरूफ काफी तू
लगता है तू भी जिम्मेदारियों का टोकरा सिर पे लांघ के निकला हैं
मृत,खोखला शरीर लिए फिरता है
लगता है सारे जज्बातों का क़त्ल कर के निकला हैं
दिखता मुकम्मल सा पर काफी अधूरा हैं तू
अपनों से बहोत ठोकरें खाया हैं
हकीक़त से अंजान बनकर तू सपनो में जीता है
केह क्यों नहीं देता तू भी हकीकत से डरता हैं
चल छोड़ सारी बाते बता
कोन है तू कहा को निकला हैं

                                                              #mynotes
                                                              Paresh jain
4 Likes

Bhut khoob !! :cherry_blossom::two_hearts:

1 Like