हबा का झोंका

मानो एक हवा का झोंका आया
जो सब कुछ उड़ाके ले गेया ।।।

बो जो पत्थरों जैसी चटान बनाई थी बिस्वास की
उसे तोड़ के रख दिया गेया ।।।।।
उड़ने चली थी बो अकास मैं
नीचे तो ऐसे ला गया उसे,
जैसे मानो धोके से पतंग की धागा काट दिया गेया ।।।।।

सब कुछ ऐसे लुटा गेया उसे
जैसे उसकी कुछ थी ही नहीं
दिल तो आज भी नहीं मानता
की ये सब हो गया, हर कोई चले गए अपने जागा
बस बो बोहि रह गया ।।।।। :boom::heart:

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Bohot khub! :heart:

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:heart::heart: