कच्ची दीवार

ये भव्य अट्टालिकाएं,
कितनी शांत जान पड़ती हैं,
पर इनकी ख़ामोशी को हकीकत मत समझ लेना,
क्या तूफ़ान मचा है अंदर,
ये सिर्फ वो ईंटे ही जानती हैं,
जो कभी किसी झोपड़े की कच्ची दीवार हुआ करती थीं,
ग़रीब के आंसुओं की राज़दार हुआ करती थीं,
आज आसमान से उसे रोता देख बस सिसक कर रह जाती हैं,
तेज़ हवाओं संग घंटों गोते लगाने वाली
आज बेजान हैं,
पर इनकी बेबसी को इनका मुक़द्दर मत समझ लेना,
इन्हें तो बस उस दिन का इंतज़ार है,
जब धरती का दिल पिघलेगा,
और वो सीधे ज़मीन में आ मिलेंगी,
फिर से कोई कच्ची दीवार बनने के लिए !!

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