"नारी" की कलम से ........🖊️

कितनी विचित्र होती हैं ये लड़कियाँ …
उड़ना चाहती हैं खुले आसमान में ,
सबकी ख़ुशी के लिए बंधन में बंध जाती हैं ।
भूल जाती हैं अपनी पसंद को ,
सबकी पसंद याद कर लेती हैं ।
कितनी विचित्र होती हैं ये लड़कियाँ …

शक्ति बसती है इनमें भरपूर,
पर सहज ही सब सहन कर लेती हैं ।
लाड़ली होती हैं इस घर सबकी,
उस घर सबकी ज़िम्मेदारी ओढ़ लेती हैं ।
कितनी विचित्र होती हैं ये लड़कियाँ…

याद आती है जब छूटे रिश्तों की ,
आँखों में आँसू भर लेती हैं।
पर एक झटके से भुला देती हैं उनको ,
कुछ मीठा सा गीत गुनगुना लेती हैं।
कितनी विचित्र होती हैं ये लड़कियाँ…

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Welcome
@Dharna_Sharma
Nice
:grinning::crossed_fingers::blush:

Thank you :slight_smile:

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wow :heart: and welcome in our yoalfazz family :grinning:

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Welcome to Yoalfaaz
With such lovely poem :heart_eyes::heart:

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Feeling your pain in this… Wish you get the best in the world yaara…

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Maza aa Gaya

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@Dharna_Sharma Welcome :clap::clap: that’s how you make an entry :grinning::heart:

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Amazing

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Well penned

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nice post :+1:
welcome to YoAlfaaz family :blush:

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Powerful. :heart:
Welcome here and keep posting. :heart:

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