दर्द-ऐ-दिल

मेरे शेर की तशरीह करोगे ,तो गम के मायने मिलेंगे
गम ना हो तो ज़िन्दगी का मतलब क्या होगा!
मेरा वजूद तलाश करोगे तो टूटे हुए आयने मिलेंगे
दर्द ना हो तो शायरी का मक़सद क्या होगा!

मेरी मोहब्बत की किताब के अब सिर्फ ,बिखरे पड़े कुछ पन्ने मिलेंगे
मौत अभी गयी तो मलाल क्या होगा !
जो दरख़्त अब मर चूका है उसके तो सूखे पड़े कुछ पत्ते मिलेंगे
बहार आ भी गयी तो कमाल क्या होगा !

आँखों में अश्क़ो का समंदर ठहरा है और रूह में ज़ख्मो के निशान मिलेंगे
कुछ आंसू छलक भी जाए तो नुक्सान क्या होगा !
अश्क़ हो या पानी हो , बरसात हद से ज़्यादा हो तो बे-शक लोग परेशान मिलेंगे
तूफ़ान में कश्ती अगर पलट ना जाए तो इम्तेहान क्या होगा !

मैं मुन्तज़िर हूँ आज भी ,की कही किस मोड़ पर हमारे रास्ते फिर से आ मिलेंगे
वो मोड़ जल्द आ गया गर, तो खुशियों का ठिकाना क्या होगा
तुम मसरूफ रह जाओगी तस्कीन ! और हम शायद ख़ाक में जा मिलेंगे
ताख़ीर करदी गर तुम ने ! तो फासलों का पैमाना क्या होगा !

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