इश्क का फितूर

एक अंधेरे में यूं उसे टूटकर चाहना
वफा के नाम उसका यूं ही मुड़ जाना
ख्वाहिशों को तो तोड़ ही जाती हैं ।
ये मुहब्बत आखिर इश्क के नाम पर
ऐसे ही कितने इंतकाम ले जाती हैं ।

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Wow @Soulful_speech
Nicely written

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osm :innocent:

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Thanks

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