मैं सोहनी वो माहीवाल हो जाए

क्या हो जो दुनिया,
चंद लम्हों में बदल जाए,
जो अभी अंधेरा है,
बस सवेरा बन जाए,
ग़स्त खाती हवा,
खुद ही से सहम जाए,
रुख मिज़ाज का बदल अब,
शायरी सुं चल जाए,
रंज फ़िज़ाओं की,
रज़ा की शकल में आए,
औरंगज़ेब भी,
दीन-ए-इलाही के कसीदे गाए,

मेरी दुनिया भी,
यूं ही बदल जाए,
इस दिल के अरमान,
उनकी सरज़मीं बन जाए,
जो वक़्त से मुझे शिकायत,
उनकी नींद में ले जाए,
और इन ख़्वाबों की दास्तान,
उनके ख़्वाब में सुनाए,
मैं उनके,
वो मेरे शेहर बस जाए,
मैं किताब बनूं,
और वो गीत बन जाए,

एक दिन के लिए ही सही,
हर जवाब का सवाल हो जाए,
ज़ख्मों पर नमक का अकाल हो जाए,
लाल बने हरा,
हरा लाल हो जाए,
मैं उनकी सोहनी,
वो मेरी माहीवाल हो जाए॥

3 Likes

waah

1 Like

Thank you @obscure_writer Saloni :grinning:

1 Like