...कल रात्रि तुम्हे फिर से ख्यालों में पाया

…कल रात्रि तुम्हे फिर से ख्यालों में पाया…

हकीक़त में ना सही, ख्वाबों में पाया।
आमने सामने ना सही, तस्वीर में पाया।।
तस्वीर में तुम्हे नहीं, तुम्हारे इकरार को पाया,
इकरार में वो पहले सा प्यार, और इजहार पाया।।
इजहार के साथ दिल्लगी का सूकून पाया,
दिल्लगी में बीते वक़्त की यादों को पाया।।
यादों में समाई तेरी मेरी हसी को पाया,
हसी में बसे उन बेहिसाब किस्सों को पाया।।
उन किस्सों में लिपटा हमारा प्यार पाया,
प्यार में हुई हजार कसमें वादों को पाया।।
वादों में छुपे हमारे अफसानो को पाया,
उन अफसानो में तुम्हे खोने का ग़म पाया।।
ग़म में बीते उस आंसुओ की बारिश को पाया,
बारिश कर हमें छोड़ गए , बस यही दर्द पाया।
~रित्ती🖤

3 Likes

Nice one choti… :blossom::blush:

1 Like

Beautiful. :heart:

1 Like

Thanks dii :two_hearts::star_struck::kissing_heart:

1 Like

Thank you… Bae :kissing_heart::kissing_heart:

1 Like