इक आस लगाकर बैठें है ☺

इक आस लगाकर बैठे है,
सूरज फिर अपनी रोशनी हमारे चेहरे पर डालेगा ,
शाम का सुहाना मौसम फिर हमको साथ बैठ
ठहाके लगाने को पुकारेगा ,

फिर खिलखिलाएगी बच्चों की शरारतें मोहल्ले में ,
फिर माँ की सहेलियों का ग्रुप किसी जगह अपनाया
अड्डा जमाएगा ,

फिर से हम दोस्तों का याराना ये दुनियां देख पाएगी ,
किसी की मोहब्बत फिर रंग लाएगी ,

फिर हम यार बैठकर चाय पर चर्चा करेंगे ,
फिर से हम एकसाथ त्योहार मनाएगे ,

बस हम सब कुछ और दिन सब्र कर ले ,
और घर में रहे तो ये जंग जीत जाएँगे ।।

6 Likes

Definitely the day will rise again…just hang in there so some more time!! We all will be proud of ourselves when this will get over…:blush:

1 Like