एक सलीके से लिख देता हूं मैं।

ऐसे ही नहीं कुछ भी लिख देता हूं मैं,
खुद के ही कुछ किस्से कहानियों को एक तरीके से लिख देता हूं मैं, ऐसे ही नहीं कुछ भी लिख देता हूं मैं,
उसके साथ होने न होने के हिस्से को एक सलीके से लिख देता हूं मैं,
ऐसे ही नहीं कुछ भी लिख देता हूं मैं,
जब वो साथ थी वो उसके साथ की छोटी से छोटी बात को एक तरीके से लिख देता हूं मैं,
ऐसे ही नहीं कुछ भी लिख देता हूं मैं,
उसके दुर जाने के बाद उसकी यादों में बीती बातों को एक सलीके से लिख देता हूं मैं,
ऐसे ही नहीं कुछ भी लिख देता हूं मैं,
कभी उदास होता हूं और उसमें याद तुम्हारी जुड जाती है,
तो उस उदासी को एक सलीके से लिख देता हूं मैं,
ऐसे ही नहीं कुछ भी लिख देता हूं मैं ॥

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Nice one @Akash_Rohilla

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Thank you @Adithyan_ks