तेरी दिवानी।

जब भी होती खाली,
तेरी याद आ जाती,
तेरा चेहरा हर वक्त,
दिमाग में रहता,
तेरी एक एक बात,
दिल को हंसाती,
कभी रुलाती,
शायद मैं हूं तेरी दिवानी।
शरीर में आ जाती है गुदगुदी,
जब तेरी सांस मेरी सांस से टकराती,
दो दिलों की धड़कनें एक हो जाती,
वो तपन आज भी मैहसूस कर पाती,
जब मेरे हाथ में आया था तेरा हाथ,
शायद ये था दिवाने पन का एक और एहसास।
जब कभी हवा में जुल्फें उड़ती,
तेरा वो मेरी जुल्फों से खेलना,
और उनकी खुशबू में मदहोश होना,
फिर अपनी उंगलियों से उन्हें सहलाना,
और मेरा इसको कभी भूल न पाना,
शायद मेरी दिवानगी का एक और अध्याय।
मेरा तुझसे मिलने निकलना,
फिर बार बार घड़ी को देखना,
कि तुम बोलोगे हर बार की तरह समय पे न पहुंचना,
ये मेरी बेताबी,
शायद मेरी दिवानगी बताती।
एग्जाम के दिनों में हमारा एक अनुबंध होना,
न तुम बात करोगे,
न मैं बात करूंगी,
कितना कठिन समय होना,
शायद मेरी दिवानगी बताती।
तुम्हारा फोन सहेली के फोन पे सुनना,
मेरा उसको मैसेज करना,
और फिर उसका तुम्हें मैसेज फार्बड करना,
तुम्हारा मुझे 143 नम्बर लिखना,
मेरा उसे रोल नम्बर बताना,
शायद मेरी दिवानगी की पराकाष्ठा।

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