चरित्र में चमत्कार लेके आओ ...।

poem
#1

चरित्र मे चमत्कार लेके आओ ,
फिरसे अदबी बहार लेके आओ ।
जो तोड़ दे हर मानसिक बेड़ियों को ,
ऐसा कोई उज्वल विचार लेके आओ ।
चरित्र मे चमत्कार लेके आओ…

जो पियूष बने दिल के मारों के लिए ,
ऐसा कोई कलाकार लेके आओ ।
जो मिटा दे अतीत के दागों को ,
ऐसा कोई नया विचार लेके लाओ ।
चरित्र मे चमत्कार लेके आओ…

जो खिला दे सहानुभूति के अरविंद को,
ऐसा कोई गुलज़ार लेके आओ ।
जो अंशु बने परेशान से काफ़िलों का ,
ऐसा कोई बरखुरदार लेके आओ ।
चरित्र मे चमत्कार लेके आओ…

मशरूफ ज़माने की भीड़ मे ,
जो आज़ाद पंछी हो कोई ।
जो लिखता है फरहंग-ए-अदबी ,
ऐसा कोई सहित्यकार लेके आओ ।
चरित्र मे चमत्कार लेके आओ…

तुरंग की तेज़ी से भी तेज़, रुतबा हो जिसका,
ऐसा कोई तेग-ए-तर्रार लेके आओ ।
जो करता न हो किसी गैर की परस्तिश ,
ऐसा कोई बंदा ख़ुद्दार लेके आओ ।
चरित्र मे चमत्कार लेके आओ…

जो कनक की चमक मे भी त्रुटि ढूंढ पाये ,
ऐसा कोई शत्तिर सुनहार लेके आओ ।
जो मामूली मिटी को भी ख़ास बना दे ,
ऐसा कोई शिल्पकार लेके आओ ।
चरित्र मे चमत्कार लेके आओ…

जो रंग भर दे बदरंगी जीवन मे ,
ऐसा कोइ चित्रकार लेके आओ ।
जो सुधर दे बिगड़ैल समाज को ,
ऐसा कोई समाज सुधार लेके आओ ।

चरित्र मे चमत्कार लेके आओ ,
फिरसे अदबी बहार लेके आओ ।

                   - शाहीर रफ़ी
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#2

very well penned and the second last para is very nice…

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#3

This is something great
Post ka tittle
Post ka sandesh
Or post khud
Teeno bemisaal hai

:+1::+1::+1:

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#4

Never a moment when I didn’t like your work.

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