आईन-ए-इश्क़ ...।

तुम नफ़रत का इक़बाल बुलंद करते रहना ,
हम आईन-ए-इश्क़ का वर्जस्व स्थापित कर देंगे ।

                      - शाहीर रफ़ी 

अगर नफ़रत का बदला नफ़रत से ही दोगे ,
तो यह पूरी दुनिया गंज-ए-कराहत बन जाएगी ।

              - शाहीर रफ़ी 

यह ख़याल भले ही बहुत आम है ,लेकिन इसकी गहराई उतनी ही है जितनी प्रचलित यह सुफ़ी चिंताधारा । मैंने भले ही अपने शब्दों में इसे व्यक्त किया है। परंतु इस ख़याल का श्रय ,भारत के महान चिश्ती संत शैख़ निज़ामउद्दीन औलिया को जाता है ,जो अपने सर्वसमावेशी मत ,सर्वधर्म प्रेम और भाईचारे की बात कहते हुए अर्ज़ करतें हैं ,
" की अगर हमारे रास्तों पर कांटे बिछाने वालों के लिए ,हम भी कांटे ही बिछाते रहे ,तो यह पूरी दुनिया कांटो से भर जाएगी । "
लोग अपने नफ़रत के ज़रिए भले ही दुनिया में नाम ओ दौलत कमा सकतें हैं ,लेकिन दिल के पाक शहर में मुहब्बत के अलावा किसी नापाक चीज़ की जगह नहीं होती है ।उम्मीद है आप लोगों को यह ख़याल पसंद आया होगा ।

Word meanings :

आईन-ए-ईश्क़ - the law of love
गंज-ए-कराहत - the treasure of hatred .

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You are going great and
Laajawab ho yaar tum

Such a beautiful way of presenting