कोरोना! अब बस भी करो ना।

ये कैसा वक्त आ गया,
इंसान इंसान से जुदा हो गया,
चाहे कोई हो अपना प्यारा,
उससे दो मीटर का करना पड़ता फांसला।
भगवान तुमने ये दिन क्यों दिखाया,
सारी दुनिया में हाहाकार मचाया,
यहां अपने को भी पराओं जैसा बना दिया,
नौबत ऐसी आ गई,
कि घर से बाहर निकलना दुविधा बन गई,
लगता तुमने मानव की परिभाषा को बदल डाला,
अब वो समाजिक कहां रह गया,
कहां गया वो समाज,
जहां बैठते उठते थे दिन-रात,
अपनों के लगते थे गले,
काटते थे दुःख सुख इकट्ठे,
अब तो हम हर किसी से दूर रहना चाहते,
अगर कोई कोशिश भी करे,
तो उसे दूर भगा डालते।
कहां वो इंसान की ताकत,
जिसने कई बार तुझे भी पीछे धकेला,
और तेरा सिंहासन भी खतरे में डाला।
एक वायरस ने कर दिया,
सब चकनाचूर,
इंसान जो रखता ताकत,
सबकुछ अपने आगे झुकाने की,
उसे समझ नहीं आ रहा,
वो क्या करे,
उससे लड़ने की बजाय,
बचने के रास्ते ढूंढ रहा।

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Behad khoobsurat rachna​:sparkles::heart:

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Thanks Wordsbyritti

are gazab :clap: :clap: :clap: