ये फासले

poem
shayari
#1

तुम कहीं होगे,हम कहीं होंगे,
इन दो राहों के फा़सले मेरी जां कम नहीं होंगे।

किसी से रूठ जाने पर हमारी याद आएगी,
तुम्हे पुरनम मनाने को मेरी जां हम नहीं होंगे।

शब-ए-तन्हाईयों में दोस्त दिल-ओ-जां खूब तड़पेगा,
कि रोना खूब आएगा की चश्मे नम नहीं होंगे।

तुम्हारे लौट जाने से ज़रा हालात नाज़ुक है,
ज़रा नासाज़ तबीयत है मगर बेदम नहीं होंगे।

मत आना कब्र पर तुम हमारा हिज़्र मनाने को,
तुम्हे दिल से लगाने को जिंदा हम नहीं होंगे।
-RISHABH

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#2

bahut khoob mere dost
bahut accha likha hai tumne
and
Welcome to YoAlfaaz family
keep writing and sharing

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#3

well composed and beautiful lines…

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#4

Shukriya janaab

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#5

That’s really a good post

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