मां की ममता।

मां! तूं हैं ऐसी मूरत,
जिससे कुछ भी नहीं खूबसूरत,
तेरी देन कोई नहीं दे सकता,
तेरा एहसान कोई नहीं चुका सकता,
तेरे जैसा दानवीर,
कोई नहीं हो सकता,
करण भी तेरे आगे बौना लगता।
तूं हमें अपने अंदर नौ महीने रखती,
फिर जन्म देती,
बहुत दुःख तकलीफे सहकर पालती,
हर धुप और प्रलय से बचाती,
कठिन समय में,
अपनी ठण्डी छांव करती,
और जिंदगी में करूणा का उदाहरण बनकर सामने आती।
मैंने कहीं पढ़ा,
“पुत्र कुपुत्र हो सकता, माता कुमाता नहीं”
तुम ही शक्ति का भी रूप,
जब जब कोई बुरी आंख उठाए,
तुम ममता से दूर्गा बन जाती,
और शत्रु के नाश के लिए डट जाती,
जब कभी कोई दीन दुखियों की बात आती,
तो तुम मदर टैरेसा का रूप धारण कर लेती।
हर कोई कहता,
इश्वर नहीं दिखता,
लेकिन मैं कहता,
दुनिया में मां ही है इश्वर,
जो खुद के लिए कुछ नहीं मांगती,
सब अपनी औलाद पे न्यौछावर कर डालती,
इतनी निस्वार्थ ममता,
और कोई उदाहरण नहीं हो सकता।

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