मोहब्बत के मारे

shayari
#1

ख़ुदगर्ज़ी शख्सियतों के बीच पला जान ना सका
मोहब्बत के मारो को कौन सहारा दे सकता भला
डूब ही जाएगी एक रोज़ ये बात पहचान ना सका
कागज़ की कस्तीयों को कौन किनारा दे सकता भला
-अदिति

3 Likes

#2

are wah… ending was very nice…

0 Likes