जीवन ,एक संघर्षमयी गीत ।

जीवन संघर्ष रुपी संजीवनी है ,
ख़ुद को इसके रंग में रंगा के तो देख ।
कर्म निष्ठा रुपी लेप को ,
कभी दुःखद घाव पर लगा के तो देख ।
अभिलाषी है तू ,साहसी है तू ,
कर्मयोग का दीपक जला के तो देख ।
‎क्षोभ ,शोक,ईर्ष्या को परित्याग कर,
‎निष्काम कर्म को अपना बना के तो देख ।
‎इच्छा मोह मुदगर का बाल्य रूप है ,
‎इसको अपने अधीन ला के तो देख ।
‎जीवन कोई स्वप्न नगरी नहीं ,
‎सपनों से ज़रा बाहर आ के तो देख ।
‎यह जग कारावास है आज़ाद पंछियों का ,
‎कभी आज़ादी से आँख मिला के तो देख ।
‎ज़िंदगी संघर्ष का मधुमय गीत है ,
‎कभी इस गीत को गुनगुना के तो देख ।

  • शाहीर रफ़ी
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