मेरा महबूब रूठ गया है

मेरा महबूब रूठ गया है जाने क्यूं
शायद कोई ख़ता हो गई है मुझसे
कोई तरकीब मनाने की बताओ यारो
आंखें क्यूं बह रही है याद में उसकी
ये सवाल भी ज़मीर कर रहा है मुझसे
दिल को भी सुकून अब ना रहा है
ये धड़कन भी जफा कर रहीं हैं मुझसे

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