किताब पर

आँखों ने अश्क गिरा दिया है यूँ क़िताब पर
मानों कोई ख़ता हो गयी हो मेरे दिल से
ये एक तरफ़ा इश्क ही है ए ग़ालिब
जो धड़कन को दिल से यूँ जुदा कर रहा है

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