मेरे घर के बगल में

मेरे घर के बगल में तेरा घर होता,
तो शायद रात में मैं अकेला ना होता,
छत पर बैठ यू ना रोता,
शायद रात में मैं अकेला ना होता…

मिलने आती जो रोज,
मुझसे घर में अकेले,
और लोगों की नजर में,
कोई नया कांड होता,
मेरे घर के बगल में,
अगर तेरा घर होता,
तो यूं काली रातों में,
मैं तन्हा ना सोया होता…

तू साथ रहती तो तेरी गोद में,
सिर रख कर सो या होता,
अगर घर के बगल में होता,
तो तेरी आवाजें आती,

मिलने आता कोई तुझसे,
तो हर पल, हर लम्हा,
मेरी जान जाती…

-Adamya Tripathi
ادمیہ ترپاٹھی-

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