'' घर ''

‘’ घर "

यह मिलता हैं मुझे प्यार बेवज़ह ही ,
मेरा घर है ज़माने से बिल्कुल अलग …

किसी जगह पर हमने बहुत वक़्त गुज़ारा हो तो वो जगह हमारे लिए बहुत खास होती है। खास केवल इसलिए नहीं होती क्योंकि वक़्त गुज़ारा है बल्कि वहाँ के जो तजुर्बे होते हैं अच्छे और बुरे वो उस जगह को खास बना देते हैं । घर वैसी ही है एक जगह है | ये हमारे सफ़र के आगाज़ का वो ठिकाना है जहाँ पर लौटकर हम पीछे मुड़ कर देखते हैं कि हम कितनी दूर आ चुके हैं । यहाँ एक अजीब सा सुकून भी है और वो शायद इसलिए की यहाँ रोज़ की तरह ज़माने से रुबरू होने के लिए हमें तैयार नहीं होना पड़ता | पर ऐसा हम अपने घर में ही क्यों महसूस कर पाते हैं? शायद उसकी वजह है उस घर के लोग | ज़माने से ज़रा अलग, घरवाले आपसे किसी मतलब, आपकी कोई ख़ूबी की वजह से ताल्लुक़ नहीं रखते बल्कि सिर्फ आपके होने से वो आपको प्यार करते हैं | तो फिर चलो, ज़रा घर जाकर आते हैं :blush:!!
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:heart_eyes::blue_heart:

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Bhut sahi likha :heart::clap:

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क्या खूब लिखा है और बिल्कुल सही लिखा है… @obscure_writer

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:blue_heart:

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Shukriya

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waaahh…bohot umda :ok_hand:

Shukriya :blush:

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awesome
really yaar bahut mast hai @obscure_writer :ok_hand:

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Shukriya

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