फिर कहीं खो जाती हूँ

shayari
love
poem
#1

Version 2 (bcoz gender discrimination isn’t good) :relieved: :-

सोच तुम्हारे बारे में…
मैं मन ही मन मुस्काता हूं…
और फिर कहीं खो जाता हूं…

याद तुम्हारी आए ना…
सो, किताबें तो मैं उठाता हूं…
पर फिर कहीं खो जाता हूं…

तुम्हारी लिखी कविताओं में…
मैं हमेशा खुद को पाता हूं…
और फिर कहीं खो जाता हूं…

तुम्हारे लिए लिखने कविता…
मैं कलम तो उठाता हूं…
पर फिर कहीं खो जाता हूं…

हर बार खुद को खो कर के…
मैं तुमको ही तो पाता हूं…
और फिर कहीं खो जाता हूं…

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#2

Hey, that’s really beautiful.
Welcome to YoAlfaaz.
Looking forward to read such more amazing works with various perspective

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#3

A warm welcome @The_sheer_notions to YoAlfaaz family
Tumhara post bahut accha, mazedar hai.
Bahut khoob likha hai tumne. Or Haan, aise hi likhti raho :slightly_smiling_face:

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#4

Thank you sir…:sweat_smile:

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#5

:slightly_smiling_face:

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#6

very well written… liked it… :slight_smile:

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