दामन पर दाग

होता अगर मैं मुसाफ़िर तेरी गलियों का ए मुजाहिर
तो कुछ दर्द का हक़दार शायद मैं भी बन जाता
इसलिए ये भी गवारा नहीं हुआ मेरे दिल को
आने से गलियों में तेरी तेरे दामन पर दाग लग जाता

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