मेरी मुहब्बत

मेरी मुहब्बत को अगर वो समझ लेती
तो बात ही क्या थी
मेरे ऐतबार को अगर वो जान लेती
तो बात ही क्या थी
उसे तो गरूर है अपने बैदाग हुस्न का
मेरी आंखों में अपना चेहरा देख कर
मेरे ज़ज्बात को अगर वो समझ लेती
तो बात ही क्या थी
मेरी मुहब्बत को अगर वो समझ लेती
तो बात ही क्या थी
मेरे दिल के करार को अगर जान लेती
तो बात ही क्या थी

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