सुकून ए हिज्र

नहीं है आरजू कोई बाकी अब
मेरे इस दिल को तेरे ज़िक्र की
धोखा दिया तूने बेवफ़ा इस कदर
नहीं है आरजू सुकून ए हिज्र की

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