हम क्या करते

ख्वाहिशें कुछ पूरी हुई, कुछ ख्वाब अधूरे रह गऐ
जब किस्मत ने साथ छोड़ दिया, तो क्या करते
तमन्ना आसमा को छूने की थी, पर हौंसले नदी मे बह गऎ
अरे हिम्मत ने दम तोड़ दिया, तो क्या करते

परिंदे जो सपनों की उड़ान भरते भरते, ज़मी पर आ गिरे
हवाओं ने रुख मोड़ लिया, तो क्या करते
मुस्कराहट की तलाश में निकले थे, पर फिर अतीत से जा मिले
अरे खुशियो ने मु मोड़ लिया, तो क्या करते

हम तो बस उनकी बातों, बर्बाद हो गए
भाई अल्फाजों ने वार किया, तो क्या करते
जीने की कुछ आस थी तस्कीन, हम फिर भी ज़िन्दा लाश हो गए
अरे अपनों ने ही मार दिया, तो क्या करते

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