मेरी माँ

आज भी जी चाहता है कि माँ के आंचल से लिपट कर रो लु
वो ज़माना जब हर वक़्त उसके पल्लू से बंधे होते थे वो फ़िर से जी लू
मगर वो मेरे सारे ग़म ले लेती है!
मेरी सारी तकलीफें अपने सर ले लेती है
इसलिए सोचती हू जितना हो सके उससे अपने दर्द छुपा लू

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:heart::heart: