याद हैं मुझें सब , भूली नहीं हूं मैं

याद हैं मुझें सब , भूली नहीं हूं मैं …
तेरे से रह कर दूर , पूरी नहीं हूं मैं
माना हूं मजबूर , लेकिन बुरी नहीं हूं मैं
ना छोड़ ऐसे आस , तेरे आऊँगी में पास
जैसे रेगिस्तान में किसी प्यासे को पानी…
जैसे मरने के बाद कोई आख़री निशानी …
जैसे साँसे मिले उसे , जिसका निकलने वाला हो दम…
ऐसे मिलेंगे हम …।।:heart:

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Khubsurat. :heart:

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Ati sundar :ok_hand::ok_hand::ok_hand:

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Amazingly penned :heart_eyes:

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Wah Wah… :heart::heart:

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