विद्याधर फरियादी

हम भी एक विद्यार्थी ठहरे ,
माना की टॉपक्लास नहीं ।
धीरे सुस्ताए अंग्रेज़ी बोल देते हैं ,
माना फास्टम फ़ास्ट नहीं ।

हम भी मैडल जीत सकतें हैं ,
हम डफर बदमाश नहीं ।
हारना तो अपना पेशा है ,
हारने पे हम उदास नहीं ।

अक्षर किताबों के बेजान से ,
इनमें जीवन की आस नहीं ।
अनुभवों के शागिर्द हैं हम ,
किताबों पर विश्वास नहीं ।

अच्छे अंक का ट्रेंड है साहब ,
ज्ञान की हमें तलाश नहीं ।
सर्टिफ़िकेट तो अपना कड़क है ,
भले ही हुए हम पास नहीं ।

दुनिया जिनकों पूजती है ,
हम वो नौकरी वाले दास नहीं ।
थर्ड क्लास का डिग्री है अपन का ,
हम पढाई में इतने ख़ास नहीं ।

अरमानों का क़त्ल ज़रूर करो ,
हम फिर भी तुमसे नाराज़ नहीं ।
वादा है बुज़दिली नहीं करूँगा ,
देखोगे तुम मेरी लाश नहीं ।

कहे विद्याधर के पापा ,
मुझे तुझपर नाज़ नहीं ।
क्योंकि परीक्षा में पास होने वाला ,
तू वह दिलेर जांबाज़ नहीं ।

उस्तादों से फ़रयाद कर रहा हूँ ,
जी हुज़ूरी मेरे पास नहीं ।
‎मैं लौट के न आ सकूँ ,
‎ऐसा कोई इतिहास नहीं ।

ताने ख़ूब खाएं हैं ,
लेकिन हुए हम हतास नहीं ।
शायारी सबकी जागीर नहीं होती,
यह क्लास की बकवास नहीं ।

            - शाहीर रफ़ी
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superb lines and very well composed…

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