मिल जाये रुबरु वो

ना जाने आज क्यूं मैं इन्तेज़ार उसका कर रहा हूं
सुकून ए दिल को ना जाने क्यूं बेक़रार कर रहा हूं
कोई कहे जाकर उससे मिल जाये मुझे रूबरू वो
मैं जो करारी में इस दिल को यूं बेक़रार कर रहा हूं

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:heart::heart:

Great Job! :slightly_smiling_face:
nice try