सुबह सुबह का ख्वाब

सुबह सुबह इक ख्वाब आया है
ख़्वाबों में उसने मुझे हंसाया है

मुझे तो लगता है मुहब्बत है उनको
तभी तो पूरी रात दिल धड़काया है

सुबह सुबह इक ख्वाब आया है
नींदों में ही दिल को चुराया है

मुझे तो लगता है बग़ावत ए दिल है
तभी तो आंखों में उनको बसाया है

सुबह सुबह इक ख्वाब आया है
मेरी मुहब्बत को उसने आज़माया है

बग़ावत नहीं करना ए दिल मेरे
शायद इसलिए ख्वाबों को सजाया है

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Sundar :heavy_heart_exclamation::cherry_blossom:

Way To Go! AWESOME