लखनऊ मेरी जान

झुलस रहा है शहर ए तहजीब
ये अदब के शहर में कुदरत का कैसा कहर है ।।

जल रहा है शहर ए तहजीब
हवा की यहां घोला किसने ये जहर है ।।

बम ,गोले,धुआं ये नहीं सभ्यता हमारी
आखिर कौन तय कर रहा इसका सफर है ।।

कौन है शहर ए शान पे निशान लाने वाले गीदड़ बताओ उनको
लखनऊ नहीं किसी के बाप का ये हमारा शहर है।।

:heartpulse:नवाबों का शहर:heartpulse:

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Kya baat. :heart:

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You’re Unique! :slightly_smiling_face:

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Thankss

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Thnkss