क्रिसमस-डे।

हर त्यौहार की अपनी एहमियत,
वैसे ही क्रिसमस की,
हर कोई बढ़-चढ़ कर मनाता,
सबकुछ बंद हो जाता,
पादरी प्यार और महौबत के संदेश पढ़ते,
हर कोई उनपे चलने का वादा करता,
क्या सचमुच असल जिंदगी में,
हम ऐसा कुछ करते।
शायद नहीं,
ये सब एक रिवाज बनके रह गये हैं,
उनके पीछे हम,
अपने अपने मतलब साधते हैं।
आज भी इंसान,
एक-दूसरे के साथ झगड़ता रहता,
ताकतवर कमजोर को तंग करता रहता,
कोई असहाय से सहानुभूति नहीं रखता,
बस मौका मिलते ही,
उसकी ऐसी-तैसी करता,
ऐसे ही ये विश्व चलता।
वरना अगर हर कोई चले यीशू के रास्ते पे,
दुनिया में स्वर्ग यहीं मिल जाए,
सारा रक्त पात खत्म हो जाए,
हर जगह एक समानता आ जाए,
क्यूं कोई किसी का शोषण कर पाएं,
कोई भी बिना छत, खाली पेट नहीं रह पाए।
परंतु इसके लिए यीशू को फिर आना होगा,
प्यार और शांति के लिए,
क्रास पे लटकना होगा,
लोगों को जगाना होगा,
साथ मिलजुल कर रहने का महत्व समझाना होगा।

4 Likes

Behad khoob :heart:

शुक्रिया।

Brilliant!

शुक्रिया।

1 Like